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Wednesday, July 24, 2019

सरकारी नौकरी हर युवाओं की पहली पसंद होती है. अगर तैयारी के दौरान कुछ बातों का ध्यान रखा जाए तो सफलता निश्चित है. हम आपको सरकारी नौकरी की तैयारी करने के लिए आवश्यक सिलेबस या पुस्तकों का लिस्ट गिनाने नहीं जा रहे बल्कि जीवन के कुछ गूढ़ दर्शन से अवगत कराने जा रहे हैं. सिलेबस एवं स्टडी मेटेरियल तो आपको चंद पैसे खर्च करने पर बाजार में उपलब्ध हो जायेंगे, पर हम इस आलेख के माध्यम से जो आपको बताने जा रहे हैं वह ना केवल परीक्षा की तैयारी के लिए उपयोगी होंगे अपितु यह भाग दौड़ से भरी जिन्दगी में आने वाले हर रोड़े को पार कर जाने की शक्ति देगा.

इंसान की सफलता और असफलता टिप्स और स्ट्रेटेजी के साथ साथ खुद के व्यक्तित्व में छिपी कुछ अदृश्य शक्तियों पर निर्भर करती है. इन शक्तियों को पहचान कर उसे सींचना है ताकि उसके प्रभाव में तीव्रता आये. क्या हो सकती हैं ये अदृश्य शक्तियां? इस प्रश्न से आपके मन में एकाएक कई बातें कौंध गयी होगी. कोई तो जादू टोने तक पहुँच गए होंगें. वापस आयें अपनी कल्पना के लोक से क्यूंकि हम अब आपको नीचे उन शक्तियों को जागृत करने के दो मन्त्र दे रहे हैं जो आपको सरकारी नौकरी की तैयारी से लेकर जीवन के हर मोड़ पर सफलता दिलाने का काम करेगी.



पहला मंत्र - एकाग्रता

एकाग्रता का सम्बन्ध मन से है. यह मन में कई तरह के विचारों के रेले पर विराम लगा देने की अवस्था है. इस अवस्था को प्राप्त कर लेने के बाद हमारा सामर्थ्य परमाणु शक्ति से भी ज्यादा बलवती हो जाता है. एक कर्मयोगी के लिए अपने साध्य को प्राप्त करने का यह साधन है.

मन की प्रकृति ही चंचलता है एवं इसपर लगाम लगाये जाने की जरुरत है वर्ना एक के बाद एक पानी के बुलबुले जैसा सृजित एवं नष्ट होते अनगिनत विचार हमें किसी एक विचार पर एकाग्र नही होने देंगी. और जब तक इंसान किसी एक विचार पर स्थितप्रज्ञ ना हो जाए तब तक उस विचार को कार्यरूप में परिणत होने का सामर्थ्य नही मिल पाता. कोई भी कार्य परिणति के पूर्व हमारे मन के धरातल में विचार के रूप में ही पनपता है. कार्य के रूप में वही विचार परिणत हो पाते हैं जिनमें प्रबलता हो, अन्य विचारों को परास्त करने की छमता हो. मन विचारों के लिए युद्ध भूमि ही है. इसलिए जो जीतेगा वही सिकंदर होगा. और जीत एकाग्रता की स्थिति में मन को बिना लाये नही मिल सकती है.
 विचारों में चलते युद्ध, द्वंद को हम उदाहरण के रूप में ऐसे समझ सकते हैं- माना किसी छात्र के मन में आईएएस बनने का विचार आता है. ये विचार तब तक मन के तल से निकल कर कार्यरूप में परिणत नही हो पायेगा जब तक कि इसके सामानांतर उठते नकारात्मक विचारों पर विजय नही पा लिया जाए. एकाग्रता की स्थिति में विजय संभव है. मन की इस स्थिति में उठते हमारे विचार पूरी तरह सफल हो जाते है क्योंकि तब मन में पीछे से आने वाली अविश्वास की आवाज नही आती।
                                                दूसरा मंत्र - आत्म विश्वास
खुद पर भरोसा, अपनी क्षमताओं पर भरोसा ही आत्म विश्वास है. इसके लिए सबसे जरुरी है अपनी क्षमता की पहचान करने की. क्योंकि अगर हम अपनी क्षमता को पहचान लेते हैं और जब अपने द्वारा सृजित साध्य को, लक्ष्य को अपनी क्षमता के अनुकूल पाते हैं तो हमारे अंदर आत्मविश्वास पनपता है.
जब हम आसपास ऐसे लोगों को देखते हैं जो हमारी तरह ही क्षमता रखते हैं और वे अपने लक्ष्य को प्राप्त कर पा रहे हैं तो इससे हमारे अंदर भी आत्मविश्वास पनपता है. पर हमें आत्मविश्वास (कॉन्फिडेंस) एवं अति आत्मविश्वास (ओवर कॉन्फिडेंस) में भेद करनेकी जरुरत है. कभी कभी देखने में आता है कि कोई प्रत्याशी, राही अपनी मंजिल को पा लेने के प्रति ओवरकॉन्फिडेंस रखता है और फिर भी अपने लक्ष्य को प्राप्त नही कर पाता है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि कभी कभी ओवर कॉन्फिडेंस हमारे लक्ष्य पाने के लिए किये जाने वाले प्रयास में कमी लाने वाली साबित होती. क्योंकि हम लक्ष्य के प्राप्ति के प्रति आश्वस्त रहने की वजह से अपनी पूरी क्षमता का उपयोग नही करते हैं.
अक्सरहां अति आत्मविश्वास अहंकार का जन्मदाता होता है जो किसी भी इंसान के लिए विनाशकारी होता है. हम अहं भाव से ग्रसित जब हो जाते हैं तो हमें हमारे अन्दर की कमियां नजर नही आने लगती है. हमारा खुद को देखने का दृष्टिकोण बदल जाता है, हम अपनी कमियों को अपनी उपलब्धि समझने लगते हैं. जो कभी कभी आत्मघाती साबित होता है. पर विश्वास हमारे लक्ष्य के सापेक्ष सकारात्मक एवं प्रेरक होता है. ये हमें और कठिन परिश्रम करने को प्रेरित करता हैं. क्योंकि हमने पूर्व में ही अपनी छमता का आकलन कर लिया होता है. और हम अपनी मेहनत के बल पर लक्ष्य को पाने के प्रति आश्वस्त होते हैं.
इस प्रकार जहाँ अति आत्मविश्वास आत्मघाती साबित होता, अहंकार को जन्म देने वाला होता वहीँ आत्मविश्वास हमें अपने लक्ष्य के प्रति प्रेरित करता, हमारे मनोबल को बनाए रखता, हमें कठिन परिश्रम के बल पर लक्ष्य को पा लेने के प्रति आश्वस्त रखता.
आत्मविश्वास एक मात्र सफलता का कारक नही है परन्तु आत्मविश्वास सफलता पाने में बहुत अहम् रोल अदा करता है. जब आपके अन्दर आत्मविश्वास होता है तो आपको कठिनाइयाँ अपने कदम पीछे खींचने को मजबूर नही करते अपितु आपको अंदर से कहती है बस एक कदम और फिर लक्ष्य, सफलता तेरे पैर चूमने को विवश होंगे.
ऊपर बताये गये एकाग्रता एवं आत्मविश्वास दो ऐसे मंत्र है जो आपके अंदर की अदृश्य शक्तियों को जाग्रत कर आपको उर्जावान बनाएगी एवं आपको अपने लक्ष्य तक पहुँचने में प्रमुख सहयोगी की भूमिका अदा करेगी. जहाँ आत्मविश्वास आपको अपने लक्ष्य से कितनी भी बाधाएं आने के वावजूद विचलित नही होने देगी वहीँ एकाग्रता आपके लक्ष्य को कभी आपसे ओझल नही होने देगा और आपको निरंतर मंजिल के करीब ले जाने में सहयोगात्मक भूमिका अदा करेगी. इस मन्त्र को जीवन में उतारने के साथ साथ कुछ और आवश्यक बातें हैं जिसे अपनाने से आपके जीवन का हर सफ़र सुखमय हो जायेगा और हर मंजिल आसान हो जाएगी.
ऐसी बात नही है कि इंसान मेहनत नही करता है इसलिए असफल हो जाता है. इस बात की पुष्टि के लिए आपको अनेकों ऐसे उदहारण मिल जायेंगे जिसमें आप पाएंगे कि कई व्यक्ति बहुत कम मेहनत करने पर ही सफलता प्राप्त कर लेते हैं. उदहारण में आपको हर क्षेत्र के व्यक्ति चाहे परीक्षा की तैयारी करने वाले हों या किसी और मंजिल को लक्षित कर प्रयास करने वाले हों मिल जायेंगे. परन्तु कुछ व्यक्ति ऐसे भी मिलेंगे जिन्होंने कठिन परिश्रम में अपना पूरा सामर्थ्य अपनी पूरी जिन्दगी खपा दी हो फिर भी वे सफलता का स्वाद नही चख पाते हैं. इसका मतलब है केवल मेहनत और कठिन परिश्रम ही सफलता का मन्त्र नही होता. तो फिर क्या हो सकता हैं सफलता का मन्त्र? क्यों मेहनत के वावजूद कुछ लोग सफल नही होते? अगर इस उत्तर के लिए शोध करें तो इसका उत्तर यही निकल कर सामने आता है कि असफल व्यक्ति ने कठिन परिश्रम तो किया पर उसके मेहनत की दिशा सही नही थी. मंजिल तक पहुँचने का मार्ग कुछ और था और वो चला जा रहा था किसी और पथ पर. दुसरे शब्दों में कहें तो उसने वो सब किया जिसे उसे लक्ष्य की प्राप्ति के लिए नही करना था और उसने वो नही किया जिसे उसे करना चाहिए था. इसलिए लक्ष्य पाने के आलोक में किये गये हर कार्य का पूर्व मंथन किये जाने की जरुरत है. हमें वैसे कार्यों को करने से बचना है जो लक्ष्य की प्राप्ति में निरर्थक साबित हों.
इसलिए हमारा प्रयास, हमारी मेहनत व्यर्थ ना जाए इसलिए कुछ निर्थक कार्यों को दरकिनार कर सार्थक कार्यों किये जाने की जरुरत है. आइये हम आपको अब बताते हैं क्या क्या नही किये जाने की जरुरत है.
जानें क्या नही करना है
किसी लक्ष्य तक पहुँचने के लिए क्या नही करना है अगर इस उत्तर को खोज लिया तो आपको अपने आप इसका उत्तर भी मिल जायेगा कि सफलता को पाने के लिए क्या क्या करना चाहिए. कुछ ऐसे कार्य जो आपको नही करने हैं:
  • नकारात्मक सोच वाले इंसान के करीब जाना.
  • असफलता से विचलित होना.
  • समय का दुरूपयोग करना.
  • बिना रणनीति बनाये लक्ष्य की तरफ बढ़ जाना.
जी हाँ आपको उपर दिए कार्य बिल्कुल ही नही करने हैं.
    नकारात्मक सोच रखने वाले से दूरी बनाएं
    अक्शर आपको अपने लक्ष्य को पाने के लिए संघर्षरत रहने के दौरान ऐसे लोग मिल जायेंगे जो नकारात्मक सोच रखते हैं. अगर कोई साधारण लक्ष्य भी हो और कोई बार बार आपसे कहे कि इस लक्ष्य को पाना आसान नही तो आपको छोटा लक्ष्य भी पहाड़ सा लगने लगेगा और वो आपकी पॉजिटिव एनर्जी का धीरे धीरे क्षय कर देगा. नकारात्मक सोच प्रयास के पहले ही हार मान लेने जैसा है. इसलिए जरुरत है ऐसे लोगों से दूर रहें या फिर इनकी बातों से अपने को प्रभावित ना होने दें.
    असफलता से विचलित ना हों
    असफलता को सफलता के पाठ के रूप में देखें. हो सकता है जिस लक्ष्य को आप पाना चाहते हैं उसे प्रथम प्रयास में आप हासिल ना कर सकें. आपको जीत की जगह हार का स्वाद भी चखना पड़ सकता है. परन्तु अगर आप अपनी हार से विचलित हो जायेंगे तो आप पुनः दूसरा प्रयास इतनी उर्जा के साथ नहीं कर पाएंगे. इसलिए जरुरत है असफलता को सफलता पाने के लिए उपयोगी पाठ के रूप में देखें. विश्लेषण करें कि कहाँ चूक हुयी आखिर, क्या कमी रह गयी प्रयास में? क्या हम उसी मार्ग पर थे जिससे लक्ष्य तक पहुंचा जा सकता है? अगर आप सकारात्मक हो इन प्रश्नों का उत्तर ढूँढने में सफल होते हैं तो निश्चय ही सफलता आपके क़दमों में होगी.
    समय का सदुपयोग करें
    चाणक्य के इस बात को जीवन में तरजीह देने की जरुरत है, उन्होंने कहा था- जो व्यक्ति जीवन में समय का ध्यान नही रखता, उसके हाथ असफलता एवं पछतावा के शिवा कुछ नही लगता है.
    समय के महत्व को जिसने पहचान लिया, उसके साथ जो कदम से कदम मिला के चल पाए वे आज के समय में मिशाल बने हुए है. प्रतिस्पर्धा के वर्तमान युग में समय की महत्ता और भी अहम भूमिका अदा करने वाली हो गई है. इस प्रतियोगी समय में समय के महत्व को नही समझने एवं इसे निरर्थक कार्यों में जाया करने का अर्थ है प्रगति की राह में स्वयं को पीछे धकेलना. इसलिए सफलता पाने के लिए समय के महत्व को समझते हुए एक एक क्षण का अपने लक्ष्य के आलोक में उपयोग करना चाहिए.
    लक्ष्य चयन के बाद उसे पाने की रणनीति बनायें
    किसी निर्धारित लक्ष्य की प्राप्ति के लिए बनाये जाने वाले कार्ययोजना ही रणनीति है. सरकारी नौकरी पाने वाले उम्मीदवारों को एक निश्चित समय सीमा के अंदर लक्ष्य पाने के लिए प्रयास करने का अवसर होता है. चूँकि समय नियत है इसलिए रणनीति बनाना और भी महत्वपूर्ण हो जाता है. चाहे युद्ध का मैदान हो या फिर जीवन का बाधा दौड़, हर क्षेत्र में सफलता पाने के लिए एक सुनियोजित कार्ययोजना, रणनीति बनाये जाने की जरुरत पड़ती है. लक्ष्य चाहे कितना भी कठिन हो, अगर उसे पाने के लिए हमने सही कार्ययोजना बनाई है तो सफलता आवश्य ही मिलेगी. जहाँ तक सरकारी नौकरी को अपना लक्ष्य बनाये हुए प्रत्यासियों के लिए जरुरी है कि अपने द्वारा चयनित पद के लिए निर्धारित पाठ्यक्रम पर पूरा शोध कर लें. और फिर नियत समय में किस प्रकार दिए गये सिलेबस को कवर किया जा सकता है इसकी योजना बना लें. ध्यान रहे अधिक पुस्तक पढने की बजाय सिलेबस को कवर करने वाले चयनित पुस्तकों का बार बार अध्ययन करना ज्यादा महत्वपूर्ण है.
    इस प्रकार अगर आप एकाग्रता एवं आत्म विश्वास के साथ समय का सदुपयोग करते हुए अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए बनाये कार्ययोजना पर अमल करेंगे तो निश्चय ही लक्ष्य को, अपनी मंजिल को नियत समय में पा सकेंगे.

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